राजस्थान में आयुर्वेदिक विभाग ‘राम भरोसे’*ग्रामीण अस्पताल 6 महीने से बंद डॉक्टरों की उपस्थिति पर सवाल, कलेक्टरों की जांच नदारद

जयपुर 16 अक्टूबर 2025: राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक और मामला सामने आया है, जहां आयुर्वेदिक विभाग को ‘राम भरोसे’ चलता हुआ बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कई ग्रामीण क्षेत्रों में बने आयुर्वेदिक अस्पताल पिछले 6 महीनों से बंद पड़े हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि डॉक्टरों की रोजाना उपस्थिति कौन सुनिश्चित कर रहा है? वहीं, जिला कलेक्टरों द्वारा इन अस्पतालों का अब तक कोई निरीक्षण नहीं किया गया है, जो सरकारी लापरवाही की ओर इशारा करता है

ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब हालिया रिपोर्ट्स में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और स्वास्थ्य योजनाओं में अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। उदाहरण के लिए, सितंबर 2025 में राजस्थान हाई कोर्ट ने आयुर्वेदिक डॉक्टरों के लिए ऐप-बेस्ड अटेंडेंस को स्थगित कर दिया था, क्योंकि इसमें कई व्यावहारिक समस्याएं थीं
इसके अलावा, राजस्थान सरकारी स्वास्थ्य योजना (RGHS) में धोखाधड़ी के मामलों में दो आयुर्वेदिक डॉक्टरों पर आरोप लगे थे, जहां बिना जांच के दवाएं लिखी जा रही थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी के चलते क्वैक (झोला छाप डॉक्टर) फल-फूल रहे हैं, और 80% मेडिकल पोस्ट खाली पड़े हैं।
“अस्पताल बन तो गए, लेकिन खुलते ही नहीं। डॉक्टर आते-जाते नहीं दिखते, और अगर कोई बीमार पड़ जाए तो शहर जाना पड़ता है। कलेक्टर साहब तो कभी झांकते तक नहीं।” हाल ही में धौलपुर जिले में एसडीएम द्वारा एक निजी अस्पताल की जांच में कोई डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ नहीं मिला था जिसके बाद अस्पताल को सील कर दिया गया। इसी तरह, जैसलमेर में एक सरकारी डॉक्टर को अनुपस्थिति के लिए सस्पेंड किया गया, जहां अटेंडेंस रजिस्टर में फर्जी एंट्री पाई गईं।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण आयुर्वेदिक अस्पतालों में मरीजों की कमी के बावजूद, डॉक्टरों की उपस्थिति अनिवार्य है। लेकिन 2018 की CAG रिपोर्ट में भी 40 आयुर्वेदिक अस्पतालों में 5 साल से कोई मरीज नहीं आने का खुलासा हुआ था, जो विभाग की लापरवाही को दर्शाता है। हाल के सोशल मीडिया पोस्ट्स में भी ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की टूटी दीवारें, जंग लगे बिस्तर और डॉक्टरों की अनुपस्थिति की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। एक पोस्ट में तो स्वीपर द्वारा मरीज के सिर में टांके लगाने का मामला सामने आया, जहां डॉक्टर नदारद थे।सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को उठा रही हैं। कांग्रेस नेता प्रियंका कक्कर ने हाल ही में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर टिप्पणी की थी, हालांकि वह दिल्ली के संदर्भ में थी। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और बिगड़ सकती है।#LoktantraKiSehat #RajasthanHealthCrisis #AyurvedaNegligence #RuralHealthcare #DoctorAbsence #RajasthanNews #BreakingNews #PublicHealth #GovtFailure #LatestNews

