राजस्थान

जोधपुर में बिना पर्ची दवाओं की अवैध बिक्री: चिकित्सा विभाग की लापरवाही पर सवाल, क्या ‘सेटिंग’ का खेल?

जोधपुर शहर और इसके ग्रामीण इलाकों में मेडिकल स्टोर्स पर डॉक्टर की पर्ची के बिना एंटीबायोटिक्स, पेनकिलर और अन्य खतरनाक दवाओं की खुलेआम बिक्री हो रही है। यह मुद्दा तब और गंभीर हो जाता है जब स्थानीय मीडिया राजस्थान पत्रिका ने जयपुर और जोधपुर में इसकी व्यापक जांच की और प्रमुखता से छापा, लेकिन जोधपुर चिकित्सा विभाग के डायरेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) की ओर से अब तक किसी भी मेडिकल स्टोर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सवाल उठ रहा है कि आखिर विभाग क्यों चुप्पी साधे हुए है? क्या दुकानदारों से ‘ऊपर तक सेटिंग’ है या मासिक ‘हफ्ता’ वसूली का खेल चल रहा है?स्थानीय निवासियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जोधपुर के व्यस्त बाजारों जैसे सरदार मार्केट, पाल रोड और ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के आसपास के स्टोर्स पर बिना पर्ची दवाएं बेचना आम बात हो गई है। एक ग्रामीण निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमारे गांव में छोटे-मोटे बुखार के लिए लोग सीधे दुकान पर जाते हैं। दुकानदार खुद ही दवा सुझाते हैं, लेकिन अगर कुछ गड़बड़ हो जाए तो जिम्मेदारी कौन लेगा?” इसी तरह, शहर के एक युवा ने शिकायत की कि बिना जांच के एंटीबायोटिक्स लेने से उनके परिवार के सदस्य को साइड इफेक्ट्स झेलने पड़े।राजस्थान पत्रिका की हालिया रिपोर्ट में जयपुर और जोधपुर के दर्जनों स्टोर्स का दौरा कर पाया गया कि 70% से अधिक दुकानों पर पर्ची मांगी ही नहीं जाती। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कई दुकानदार बिना फार्मासिस्ट डिग्री के ही स्टोर चला रहे हैं, जो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 का सीधा उल्लंघन है। पत्रिका ने प्रमुखता से इस मुद्दे को उठाया, लेकिन चिकित्सा विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। विभाग के डायरेक्टर डॉ. आर.के. मीणा और सीएमएचओ डॉ. जोगेंद्र सिंह से संपर्क करने पर उन्होंने ‘जांच जारी’ का जवाब दिया, लेकिन कोई समयसीमा या कार्रवाई का विवरण नहीं साझा किया।इस बीच, एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी सामने आया कि कई दुकानदार महज 5,000 रुपये में मेडिकल लाइसेंस हासिल कर लेते हैं। सामान्यतः ड्रग लाइसेंस के लिए फार्मेसी काउंसिल से डी.फार्मा या बी.फार्मा डिग्री अनिवार्य है और शुल्क हजारों में होता है, लेकिन कथित तौर पर भ्रष्टाचार के चलते यह प्रक्रिया सरलीकृत हो गई है। एक पूर्व फार्मासिस्ट ने बताया, “लाइसेंस के लिए कागजात जमा करने पड़ते हैं, लेकिन कुछ लोग एजेंटों के जरिए ‘शॉर्टकट’ अपनाते हैं। विभाग की निगरानी कमजोर होने से यह संभव हो पाता है।” मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्य में हाल ही में बिना फार्मासिस्ट स्टोर चलाने पर 3 महीने जेल और 2 लाख जुर्माने का सख्त नियम लागू हुआ है, लेकिन राजस्थान में अभी ऐसी कोई पहल नहीं दिख रही।स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देशों के मुताबिक, बिना पर्ची शेड्यूल H दवाओं की बिक्री पर 5 साल तक की कैद या लाखों का जुर्माना हो सकता है, लेकिन जोधपुर में पिछले एक साल में महज 5-6 मामलों में ही सीमित कार्रवाई हुई। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बढ़ रहा है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा है। अब सवाल यह है कि क्या विभाग की इस लापरवाही के पीछे दुकानदारों से ‘मासिक हफ्ता’ या उच्च अधिकारियों से सेटिंग है? या फिर सिर्फ संसाधनों की कमी?चिकित्सा विभाग से तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग हो रही है। स्थानीय विधायक ने भी सदन में इस मुद्दे को उठाने का ऐलान किया है। क्या यह खबर विभाग को झकझोर पाएगी, या अवैध बिक्री का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा?#JodhpurMedicalScam #बिना_पर्ची_दवाई #चिकित्सा_विभाग_लापरवाही #RajasthanPatrikaExposed #MedicalStoreCorruption #JodhpurHealthAlert #DrugLicenseRacket #CMHOJodhpur #RajasthanHealthCrisis #अवैध_दवा_बिक्री

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